साँवली


एकदिन साँवली दौड़कर आई और अपनी माँ अहल्या से पूछा, "माँ मैं साँवली क्यों हूँ?"
अहल्याने मुस्कुराते उत्तर दिया, "क्यों कि तुम रात में पैदा हुई थी।"
"माँ, तुम हमेशा झूठ कहतीहो, रातको पैदा होनेसे कोई साँवली होजाता है भला? मुझे येरंग अच्छा नहीं लगता।" मुँह फुलाकर उसने कहा।
"तुम मेरी सब से सुंदर बिटिया हो। कृष्ण भगवान का आर्शीवाद भी है तुम पर।" अहल्याने उसके गाल पर चूमते हुए कहा।
"मुझे साँवले लोग अच्छे नहीं लगते।" साँवली नाराज़ हो कर वहाँ से चली गयी।
स्कूल के रास्ते लौटते रास्ते में उसने मंदिर देख अंदर गयी और भगवान से पूछा, "भगवान तुमने मुझे साँवली क्यों बनाया? मुझे स्कूल के सभी बच्चे चिढ़ाते हैं। मुझे साँवली नहीं रहना। मुझे गोरी बना दो।"
तब मंदिर की पुजारी आये और पूछा, "बेटी कभी तुमने कृष्णजी की तस्वीर देखी है? बोलो कृष्ण किस रंग के हैं?"
"कृष्णजी तो साँवले हैं।" साँवली ने कहा।
"पता है वे रात को पैदा हुए थे।"
"अच्छा।"साँवली ने कहा।
"हाँ, कृष्णजी साँवले हैं और पूरी दुनिया उन्हें पूजती है। वह तुम्हें बहुत प्यार करते हैं इसलिये तुम्हें अपने जैसा सुंदर बनाया है फिर तुम क्यों अपने रंग को लेकर दुखी होती हो?"
"मुझे सब चिढ़ाते हैं।"
"चूँकि तुम खास हो और बाकी सब तुम सा नहीं हैं, इसलिए चिढ़ाते हैं।"
"आप सच कह रहे हो?" आँखे बड़े कर आनंदश्चर्य से कहा साँवली।
"हाँ बिल्कुल सच।"
साँवली के चेहरे पर मुस्कान खिलगयी। जैसे उसके सारे उलझन सुलझ गये। वह नाचती कूदती घर की और बढ़गयी।
©लता तेजेश्वर 'रेणुका



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