मेरे पापा
मेरे पापा, आप मुझे बहुत याद आते हो, माँ को भी। माँ कहती थी आखिरी बार जब आपने मुझे देखा था, तब मैं सिर्फ 4 साल की ही थी। अब मैं बड़ी हो गयी हूँ स्कूल भी जा रही हूँ। माँ मेरी दो चोटी बनाती है और वही मुझे स्कूल छोड़ने भी आती है। अब मैं माँ को परेशान नहीं करती, बड़ी हो गयी हूँ न। माँ जो भी बनाती है चुपचाप अपने हाथ से खा लेती हूँ। जब भी माँ मेरी दो चोटी बनाती रहती है आप की बहुत सारे बातें सुनाती है। आपका मेरे लिए रातों को जागते रहना, मुझे गोद में लेकर चांदनी रात में परियों के कहानी सुनाना, मुझे तो सिर्फ हलकी सी याद है लेकिन माँ की बातों में मैं रोज़ आप को सुनती रहती हूँ। आपको यहां से गये चार साल हो गये हैं पर मैं अपनी माँ की आँखों में रोज़ आपको देखती हूँ। जब भी वह मुझे गोद में लेकर खिलाती है आप की ही बात करती है। जैसे की उसी दिन ही जिंदगी कहीं ठहर गयी हो, जिस दिन आप हमें छोड़ कर गए थे। मैं तो फिर भी कभी नाराज़ हो जाती हूँ की आप हमें यहां अकेले छोड़ गए, लेकिन माँ तो ये भी नहीं समझती की आप हमसे दूर हैं। वो तो सारा दिन आप ही से बात करती रहती है। पापा इस महीने मेरा जन्म दिन है याद है न? मेरे दो...