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रिश्ते रास्ते के

8साल का सुंदर पार्क के बेंच पर बैठे रो रहा था। सम्भूनाथजी उस ओर से गुजर रहे थे, सुंदर को रोते हुए देख रुक कर पूछा, "अरे बेटा क्यों रो रहे हो।" सुंदर ने सम्भूनाथजी की ओर देखा और अपने कोहनी में लगी चोट को दिखाया। चोट गहरा था, खून निकलरहा था। सम्भूनाथजी ने अपने रुमाल निकाल कर पट्टीकरते हुए पूछा, "तुम्हारे साथ कोई नहीं आया है।"  सुंदर ने इशारे से "नहीं" कहा।  उसके चोट पर पट्टी कर उसके पास बैठ कर कहा "मेरा पोता बिल्कुल तुम्हारे उम्र का है। और तुम जैसा दिखता भी है।" सुंदर आँखेबड़े करके कहा "अच्छा, फिर अब वह कहाँ है? आपके साथ नहीं रहता?" " वह अपने पापा यानी मेरे बेटे के साथ विदेश में है।" "फिर आप अकेले यहाँ हैं? उनके साथ क्यों नहीं गये?" मासूम सवाल कर बैठा।  शम्भूनाथ जी के पास उसके सवाल का जवाब नहीं था। सुंदर ने फिर से कहा, "क्या मैं आपको दादाजी बुलाऊँ मेरा कोई दादाजी नहीं है।" "जरूर।" आप रोज़ यहाँ आते हो? नहीं पर अब से आऊँगा, तुम जो मिल गये हो। सुंदर को गोद में बिठाते कहा। हाँ मैं भी आप से मिलने रोज़ आऊँगा...

साँवली

एकदिन साँवली दौड़कर आई और अपनी माँ अहल्या से पूछा, "माँ मैं साँवली क्यों हूँ?" अहल्याने मुस्कुराते उत्तर दिया, "क्यों कि तुम रात में पैदा हुई थी।" "माँ, तुम हमेशा झूठ कहतीहो, रातको पैदा होनेसे कोई साँवली होजाता है भला? मुझे येरंग अच्छा नहीं लगता।" मुँह फुलाकर उसने कहा। "तुम मेरी सब से सुंदर बिटिया हो। कृष्ण भगवान का आर्शीवाद भी है तुम पर।" अहल्याने उसके गाल पर चूमते हुए कहा। "मुझे साँवले लोग अच्छे नहीं लगते।" साँवली नाराज़ हो कर वहाँ से चली गयी। स्कूल के रास्ते लौटते रास्ते में उसने मंदिर देख अंदर गयी और भगवान से पूछा, "भगवान तुमने मुझे साँवली क्यों बनाया? मुझे स्कूल के सभी बच्चे चिढ़ाते हैं। मुझे साँवली नहीं रहना। मुझे गोरी बना दो।" तब मंदिर की पुजारी आये और पूछा, "बेटी कभी तुमने कृष्णजी की तस्वीर देखी है? बोलो कृष्ण किस रंग के हैं?" "कृष्णजी तो साँवले हैं।" साँवली ने कहा। "पता है वे रात को पैदा हुए थे।" "अच्छा।"साँवली ने कहा। "हाँ, कृष्णजी साँवले हैं और पूरी दुनिया उन्हें पूजती है। व...

मेरे पापा

मेरे पापा, आप मुझे बहुत याद आते हो, माँ को भी। माँ कहती थी आखिरी बार जब आपने मुझे देखा था, तब मैं सिर्फ 4 साल की ही थी। अब मैं बड़ी हो गयी हूँ स्कूल भी जा रही हूँ। माँ मेरी दो चोटी बनाती है और वही मुझे स्कूल छोड़ने भी आती है। अब मैं माँ को परेशान नहीं करती, बड़ी हो गयी हूँ न। माँ जो भी बनाती है चुपचाप अपने हाथ से खा लेती हूँ। जब भी माँ मेरी दो चोटी बनाती रहती है आप की बहुत सारे बातें सुनाती है। आपका मेरे लिए रातों को जागते रहना, मुझे गोद में लेकर चांदनी रात में परियों के कहानी सुनाना, मुझे तो सिर्फ हलकी सी याद है लेकिन माँ की बातों में मैं रोज़ आप को सुनती रहती हूँ। आपको यहां से गये चार साल हो गये हैं पर मैं अपनी माँ की आँखों में रोज़ आपको देखती हूँ। जब भी वह मुझे गोद में लेकर खिलाती है आप की ही बात करती है। जैसे की उसी दिन ही जिंदगी कहीं ठहर गयी हो, जिस दिन आप हमें छोड़ कर गए थे। मैं तो फिर भी कभी नाराज़ हो जाती हूँ की आप हमें यहां अकेले छोड़ गए, लेकिन माँ तो ये भी नहीं समझती की आप हमसे दूर हैं। वो तो सारा दिन आप ही से बात करती रहती है। पापा इस महीने मेरा जन्म दिन है याद है न? मेरे दो...